वृंदावन रज – श्रीकृष्ण-धाम की पवित्र धूल
वृंदावन की पावन भूमि से संकलित यह रज श्रीकृष्ण के चरणामृत-स्पर्श की दिव्य ऊर्जा से भरपूर है। पूजा, तिलक, ध्यान और दैनिक आध्यात्मिक साधना में शुभ एवं मंगलकारी।
वृंदावन रज वह पवित्र धूल है जहाँ श्रीकृष्ण ने अपनी अद्भुत लीलाएँ कीं।
यह भूमि यमुना तट, गोवर्धन, नंदगांव और वृंदावन के विहारों की दिव्य कंपन धारण किए हुए है।
भक्त इसे तिलक, पूजा, ध्यान, संकीर्तन, व्रत तथा आध्यात्मिक शुद्धि के लिए उपयोग करते हैं।
वृंदावन रज मन में भक्ति, नम्रता, शांति और श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम-जागरण का दिव्य अनुभव कराती है।
वृंदावन रज केवल मिट्टी नहीं—यह स्वयं श्रीव्रजधाम का दिव्य स्पर्श है।
वह धूल जहाँ श्रीकृष्ण ने अपने बाल-लीलाओं में गोचारण किया, ग्वाल-बालों संग क्रीड़ा की, गोकुल-वनों में बांसुरी बजाई, और भक्तों को प्रेम-रस में सराबोर किया।
सदियों से संत और भक्त इस रज को मानते आए हैं—
- श्रीकृष्ण के चरणों की पावन धूल
- मन-हृदय को पवित्र करने वाली दिव्य शक्ति
- संपूर्ण भक्ति और समर्पण का प्रतीक
पूजा, तिलक, जप-ध्यान, संकीर्तन, व्रत, तथा अपने पवित्र स्थान (altar) में इसे रखने से मन में कृष्ण-चेतना, आंतरिक शांति और दिव्यता का भाव स्वाभाविक रूप से बढ़ता है।
इस रज की सुगंध, कोमलता और दिव्य ऊर्जा भक्त-हृदय को श्रीकृष्ण की कृपा से जोड़ देती है।
अपने घर, पूजा-स्थान और जीवन में वृंदावन रज के माध्यम से श्रीकृष्ण की कृपा का पावन स्पर्श आमंत्रित करें।
वृंदावन की रज (मिट्टी) हिंदू धर्म और श्रीकृष्ण भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र मानी जाती है।
क्योंकि यह वही भूमि है जहाँ—
- श्रीकृष्ण ने अपनी बाल-लीलाएँ कीं,
- गोपियों के साथ रास-लीला की,
- गऊओं को चराया,
- यमुना तट पर बांसुरी बजाई,
- और भक्तों को अपने प्रेम और माधुर्य का अनुभव कराया।
भक्तों का विश्वास है कि—
“वृंदावन की रज में स्वयं श्रीकृष्ण के चरणों की धूल बसी है।”
इस रज को माथे पर लगाना, पूजा में रखना, या संकीर्तन के समय धारण करना आध्यात्मिक पुण्यकारी माना गया है।
यह भक्त के भीतर विनम्रता, प्रेम, दैवी भाव और श्रीकृष्ण-चेतना जगाती है।
वृंदावन राज का स्पर्श भी भक्त के मन को यह स्मरण कराता है कि—
“हम भगवान की शरण में हैं और उनकी कृपा की धूल ही हमारी सबसे बड़ी संपत्ति है।”
Leave your comment
Related posts
Bhaja Govindam, also called Charpat Panjarika Stotram, is a devotional and philosophical hymn composed by Adi Shankaracharya. It emphasizes the impermanence of worldly pleasures and encourages devotion to Govinda (Krishna) [...]
"भाईजी पावन स्मरण" is a deeply revered book that offers an intimate glimpse into the life, thoughts, and contributions of Shri Hanuman Prasad Poddar, lovingly referred to as "Bhaiji." A [...]
"Brave and Honest Children" is an inspiring book published by Gita Press, Gorakhpur, aimed at nurturing the moral and ethical values of children. The book is a collection of short, [...]





