Description
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संत-वाणी प्रथम शतक एक आध्यात्मिक एवं भक्तिपूर्ण ग्रंथ है, जिसमें भारतीय संत परंपरा के महान संतों की वाणी (उपदेश, भजन, दोहे, पद आदि) का संकलन किया गया है। यह ग्रंथ मुख्य रूप से भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और आत्म-उन्नति के मार्ग को सरल भाषा में प्रस्तुत करता है।
ग्रंथ की विशेषताएँ
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संतों की वाणी का संग्रह
इसमें कबीर, रैदास, नामदेव, तुलसीदास, दादू दयाल जैसे प्रसिद्ध संतों की शिक्षाएँ संकलित हैं। -
भक्ति और ज्ञान का समन्वय
यह ग्रंथ भक्ति (ईश्वर प्रेम) और ज्ञान (आत्म-बोध) दोनों का सुंदर मेल प्रस्तुत करता है। -
सरल एवं प्रभावी भाषा
वाणी साधारण बोलचाल की भाषा में है, जिससे आम जन भी इसे आसानी से समझ सकता है। -
नैतिक और आध्यात्मिक शिक्षा
इसमें अहंकार त्याग, सत्य, प्रेम, करुणा, संतोष और सेवा जैसे मूल्यों पर जोर दिया गया है। -
आत्मिक शांति का मार्ग
यह मनुष्य को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर परम सत्य की खोज के लिए प्रेरित करता है।
उद्देश्य
“संत-वाणी प्रथम शतक” का मुख्य उद्देश्य मानव जीवन को सही दिशा देना, आत्मिक शुद्धता विकसित करना और ईश्वर-भक्ति के मार्ग पर अग्रसर करना है।
सार
यह ग्रंथ केवल धार्मिक पुस्तक नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाला मार्गदर्शक है। संतों की अमृतवाणी मन को शांति देती है और जीवन को सकारात्मक दिशा प्रदान करती है।
अगर आप चाहें, तो मैं इसका विस्तृत सार, अध्यायवार विवरण, या कुछ प्रमुख दोहे/पदों की व्याख्या भी लिख सकता हूँ।
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