जीवन के सूत्र / Jeevan Ke Sutra

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भारत वर्ष में भक्तिकालके बाद जिन सन्तों -महात्माओं द्व्रारा समाज को सन्मार्ग पर प्रेरित करनेका बहुयामी प्रयास किया गया उनमें ‘भाईजी ‘ श्री हनुमान प्रसादजी पोद्दार का नाम अग्रगण्य है | सामाजिक कार्यों के साथ -साथ साधनाके उच्चताम स्तर पर पहुँचे हुए बिरले लोगों में वे थे | और उनका ह्रदय श्रीराधा -माधव की क्रीड़ा -स्थली बन गया था और उनका जीवन -व्यवहार स्वयं श्रीकृष्ण कर रहे थे |

Description

भारत वर्ष में भक्तिकालके बाद जिन सन्तों -महात्माओं द्व्रारा समाज को सन्मार्ग पर प्रेरित करनेका बहुयामी प्रयास किया गया उनमें ‘भाईजी ‘ श्री हनुमान प्रसादजी पोद्दार का नाम अग्रगण्य है | सामाजिक कार्यों के साथ -साथ साधनाके उच्चताम स्तर पर पहुँचे हुए बिरले लोगों में वे थे | और उनका ह्रदय श्रीराधा -माधव की क्रीड़ा -स्थली बन गया था और उनका जीवन -व्यवहार स्वयं श्रीकृष्ण कर रहे थे |

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